हमे सब दिखता है। हम सब देख सकते है। हम संसार में रहते है। हम हर रोज कई घटनाए देखते है। हम हर रोज नए समाचार देखते है। हम आंतकवाद , राजनीति ,अपराध और अन्याय की घटनाएँ देखते है। पर हम करते क्या है?कुछ नहीं करते है। पर हम कुछ करने का प्रयास करते है। तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पढता है। और इसका प्रभाव हम पर भी पढता है। लेकिन विश्व में कुछ लोग ही ऐसा कर पाते है। हम हमारे घर में भी कई समस्याएँ होती है। पर शायद ही हम कुछ कर पाते है।
Saturday, August 1, 2015
Monday, July 6, 2015
soul-mind
१ आप को सभी दिखता हैं , पर आप कुछ कर नहीं कर सकते , क्यों कि आप कर्त्ता नहीं हो ,आप दृष्टा हो, और यदि कर्त्ता बनने की चेष्टा की तो विशेष परिणाम प्राप्त होता हैं!
२ मनुष्य सत्य से काफी दूर है मानव से उत्कृष्ट मानव समाज भी !
३ आज , क्षण स्व की दृष्टि में भ्रष्ट हो गया है !
४ असत्यता की गहराई उत्तर गईहै !
५ वह तो घटित होना ही था ,ही !वह घटित होता जाता हैं !
६ आप स्वतः खड़े होते हो,बीच में !उस घटना का साक्षी भी और निमित्त भी !
७ तंत्र अगर बार -बार प्रभाव से प्रभावित होता रहें , तो तंत्र भ्रष्ट हो जाता है !
८ तंत्रों का समूह ही स्व तंत्र पर विशेष प्रभाव डालता हैं !
९ तंत्र का तंत्र के पीछे रहना ही प्रभाव है !
१० इस प्रभाव से मुक्त हो ,स्वयं को सत्य मार्ग पर चलाना ही आनन्द है, और यही मन का दुःख है !
लेबल:
man ka dukh,
man ki bat
स्थान:
Southern Asia
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