Monday, July 6, 2015

soul-mind


   १   आप को सभी दिखता हैं , पर आप कुछ कर नहीं कर सकते , क्यों कि  आप कर्त्ता   नहीं हो ,आप  दृष्टा हो, और यदि कर्त्ता बनने  की चेष्टा की तो विशेष  परिणाम  प्राप्त होता हैं! 

२  मनुष्य सत्य से काफी दूर है मानव  से उत्कृष्ट  मानव समाज भी !

३ आज , क्षण स्व की दृष्टि में भ्रष्ट हो गया  है !

४ असत्यता की गहराई उत्तर गईहै ! 

वह तो घटित होना ही था ,ही !वह घटित होता जाता  हैं !

६ आप  स्वतः  खड़े होते हो,बीच में !उस घटना  का साक्षी  भी  और निमित्त भी !

  तंत्र  अगर   बार -बार प्रभाव  से प्रभावित  होता रहें , तो तंत्र  भ्रष्ट हो  जाता  है ! 

  ८ तंत्रों का समूह ही स्व  तंत्र पर विशेष प्रभाव डालता हैं !

९    तंत्र का तंत्र के पीछे रहना  ही प्रभाव है ! 

१०   इस  प्रभाव से मुक्त हो ,स्वयं  को सत्य मार्ग पर चलाना  ही आनन्द है, और यही मन का दुःख है !