Thursday, March 24, 2016
Monday, March 7, 2016
Saturday, February 13, 2016
गीता सार
गीता सार
१-जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है ।जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।भूत का पश्चाताप मत करो ,भविष्य की चिन्ता भी मत करो।
२-क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो ? किससे व्यर्थ डरते हो ? कौन तुम्हें मार सकता है ? आत्मा न पैदा होती है न मरती है।
३-तुम्हारा क्या गया ? तुम क्या लाये थे ,जो तुमने खो दिया ? तुमने क्या पैदा किया था ,जो नाश हो गया ?
४-न तुम कुछ लेकर आये, जो लिया यहीं से लिया ,जो दिया यहीं पर दिया । जो लिया परमात्मा से लिया , जो दिया परमात्मा को दिया । खाली हाथ आए , खाली हाथ चले ।
जो आज तुम्हारा है कल किसी और का था , परसों किसी और का होगा ।
परिवर्तन संसार का नियम है ।
५-जिसे तुम मृत्यु समझते हो ,वही तो जीवन है । एक क्षण में तुम करोड़ो के स्वामी बन जाते हो , दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो ।
मेरा-तेरा ,छोटा-बड़ा, अपना-पराया मन से मिटा दो ,विचार से हटा दो ,फिर सब तुम्हारा है ,तुम सबके हो ।
६-न यह शरीर तुम्हारा है ,न तुम शरीर के हो। यह नश्वर शरीर अग्नि ,जल ,पृथ्वी , आकाश से बना है और इसी में मिल जायेगा ।
आत्मा स्थिर है ,अनश्वर है, फिर दु:ख क्यों ?
तुम अपने आप को भगवानको अर्पित करो । यही सब से उत्तम सहारा है । जो इस सहारे को जानता है , वह भय .चिन्ता ,शोक से सर्वदा मुक्त है ।
७-जो कुछ भी तुम करते हो ,उसे ईश्वर को अर्पण करते चलो । इसी से तुम सदा जीवन -मुक्ति -आनन्द अनुभव करोगे ।
१-जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है ।जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।भूत का पश्चाताप मत करो ,भविष्य की चिन्ता भी मत करो।
२-क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो ? किससे व्यर्थ डरते हो ? कौन तुम्हें मार सकता है ? आत्मा न पैदा होती है न मरती है।
३-तुम्हारा क्या गया ? तुम क्या लाये थे ,जो तुमने खो दिया ? तुमने क्या पैदा किया था ,जो नाश हो गया ?
४-न तुम कुछ लेकर आये, जो लिया यहीं से लिया ,जो दिया यहीं पर दिया । जो लिया परमात्मा से लिया , जो दिया परमात्मा को दिया । खाली हाथ आए , खाली हाथ चले ।
जो आज तुम्हारा है कल किसी और का था , परसों किसी और का होगा ।
परिवर्तन संसार का नियम है ।
५-जिसे तुम मृत्यु समझते हो ,वही तो जीवन है । एक क्षण में तुम करोड़ो के स्वामी बन जाते हो , दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो ।
मेरा-तेरा ,छोटा-बड़ा, अपना-पराया मन से मिटा दो ,विचार से हटा दो ,फिर सब तुम्हारा है ,तुम सबके हो ।
६-न यह शरीर तुम्हारा है ,न तुम शरीर के हो। यह नश्वर शरीर अग्नि ,जल ,पृथ्वी , आकाश से बना है और इसी में मिल जायेगा ।
आत्मा स्थिर है ,अनश्वर है, फिर दु:ख क्यों ?
तुम अपने आप को भगवानको अर्पित करो । यही सब से उत्तम सहारा है । जो इस सहारे को जानता है , वह भय .चिन्ता ,शोक से सर्वदा मुक्त है ।
७-जो कुछ भी तुम करते हो ,उसे ईश्वर को अर्पण करते चलो । इसी से तुम सदा जीवन -मुक्ति -आनन्द अनुभव करोगे ।
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